रेखा श्रीवास्तव Writer | Latest Articles by रेखा श्रीवास्तव

hindigen : चाहत !

10 June 2026 3:49 PM

hindigen : दो शब्द!

19 March 2026 6:39 PM

hindigen : दोहे!

03 February 2026 5:00 PM

hindigen : स्वयंभू !

02 November 2024 8:42 PM

कथा-सागर -जीवन के सफर में कितने फूल और उनके साथ काँटों का सुख भी मिलता है. उनको चुन लिया और फिर कहीं फूलों के साथ और कहीं काँटों के बीच फूल की कोमलता सब को पिरो लिया और थमा दिया . सारे अहसास अपने होते हैं, चाहे वे दूसरों ने किये हों. उनको महसूस करने की जरूरत होती है और कभी तो कोई अपने अहसासों को थमा कर चल देता है और उनको रूप कोई और देता है. फिर महसूस सब करते हैं.कथानक इसी धरती पर हम इंसानों के जीवन से ही निकले होते हैं और अगर खोजा जाय तो उनमें कभी खुद कभी कोई परिचित चरित्रों में मिल ही जाता है.