आपका-अख्तर खान "अकेला" : और ख़़ुदा सच्ची बात को अपने कलाम की बरकत से साबित कर दिखाता है अगरचे गुनाहगारों को ना गॅवार हो
आपका-अख्तर खान "अकेला" : वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)
आपका-अख्तर खान "अकेला" : छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है
आपका-अख्तर खान "अकेला" : राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों को राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा, दिल्ली तक मिलेगा लाभ
आपका-अख्तर खान "अकेला" : आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे
आपका-अख्तर खान "अकेला" : फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे
आपका-अख्तर खान "अकेला" : दिल्ली में पुलिसकर्मी द्वारा हमला एवं मारपीट, दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं करने पर जयपुर में Zero FIR दर्ज कराने का विधिक अधिकार
आपका-अख्तर खान "अकेला" : और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम जि़म्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
आपका-अख्तर खान "अकेला" : नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुर
आपका-अख्तर खान "अकेला" : फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो
आपका-अख्तर खान "अकेला" : और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज़्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिशते) लिखते ज
आपका-अख्तर खान "अकेला" : और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालाकि उनके (वक़्त के) रसूल वाजेए व रौशन मोजि़ज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं
आपका-अख्तर खान "अकेला" : क्या लोगों को इस बात से बड़ा ताज्जुब हुआ कि हमने उन्हीं लोगों में से एक आदमी के पास वही भेजी कि (बे ईमान) लोगों को डराओ और ईमानदारो को इसकी ख़ुश ख़बरी सुना दो कि उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में बुलन्द दर्जे है (मगर) कुफ्फार (उन आयतों को सुनकर) कहने
आपका-अख्तर खान "अकेला" : कोटा मंडल में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स एवं युवाओं के साथ 'रेल जन संवाद' आयोजित
आपका-अख्तर खान "अकेला" : और ये लोग (ख़़ुदा की राह में) थोड़ा या बहुत माल नहीं खर्च करते और किसी मैदान को नहीं क़तआ करते मगर फौरन (उनके नामाए अमल में) उनके नाम लिख दिया जाता है ताकि ख़ुदा उनकी कारगुज़ारियों का उन्हें अच्छे से अच्छा बदला अता फरमाए
आपका-अख्तर खान "अकेला" : नवरात्रि वर्ष में दो होती है एक आश्विन मास की शुक्ला प्रतिपदा से आरंभ होकर नवमी तक रहती है ।
आपका-अख्तर खान "अकेला" : (ये लोग) तौबा करने वाले इबादत गुज़ार (ख़़ुदा की) हम्दो सना (तारीफ़) करने वाले (उस की राह में) सफर करने वाले रूकूउ करने वाले सजदा करने वाले नेक काम का हुक्म करने वाले और बुरे काम से रोकने वाले और ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुयी) हदो को निगाह रखने वाले हैं और (ऐ
आपका-अख्तर खान "अकेला" : राजस्थान से गुजरात तक पहुँचा अंगदान जागरूकता का कारवाँ, शाइन इंडिया फाउंडेशन ने बढ़ाए कदम
आपका-अख्तर खान "अकेला" : और (मुसलमानों) तुम्हारे एतराफ़ (आस पास) के गॅवार देहातियों में से बाज़ मुनाफिक़ (भी) हैं और ख़ुद मदीने के रहने वालों मे से भी (बाज़ मुनाफिक़ हैं) जो निफ़ाक पर अड़ गए हैं (ऐ रसूल) तुम उन को नहीं जानते (मगर) हम उनको (ख़ूब) जानते हैं अनक़रीब हम (दुनिया में)